दतिया। विश्व प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ मंदिर में कुछ दलाल साधकों की वजह से पांडा गिरी को बढ़ावा मिलने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए खुले में जप और साधना पर रोक लगा दी है। अब साधना केवल मंदिर परिसर में बने मणिपुर धाम और निर्धारित साधना स्थल पर ही की जा सकेगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की ठगी या दबाव का सामना न करना पड़े।
मंदिर में पूजा-पाठ और साधना के नाम पर श्रद्धालुओं से मोटी रकम वसूले जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं, जांच में सामने आया कि कुछ तथाकथित साधक पांडा गिरी जैसी गतिविधियों के जरिए अनुष्ठान के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ रहे थे, जबकि मंदिर परंपरा में इस तरह की दक्षिणा या जबरन वसूली का कोई प्रावधान नहीं है। इस स्थिति से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही थी और मंदिर की छवि भी प्रभावित हो रही थी।
स्थिति पर नियंत्रण के लिए मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन की संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि जो साधक मंदिर से पंजीकृत हैं वे अपने निर्धारित स्थान पर ही बैठकर साधना करेंगे और अन्य साधक भी उन्हीं के साथ नियमों के तहत जप कर सकेंगे। मंदिर परिसर में इस संबंध में सूचना चस्पा कर दी गई है और पूरे परिसर की निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की गई है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था दोबारा न पनपे।
वरिष्ठ आचार्य पंडित विष्णु कांत मुड़िया ने कहा कि पांडा गिरी खत्म करने के लिए यह फैसला जरूरी था, असली साधक नियमों के अनुसार साधना करेंगे लेकिन दलालों की वजह से पीठ और मंदिर की बदनामी हो रही थी, जिसे रोकने के लिए प्रशासन के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है।
दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने भी साफ कहा कि जिला प्रशासन मंदिर प्रबंधन के साथ मिलकर काम कर रहा है और किसी भी हाल में मंदिर परिसर में पांडा गिरी को पनपने नहीं दिया जाएगा, जो भी दलाल या अवैध गतिविधियों में शामिल पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

