MP जनसुनवाई में सिस्टम की बेबसी उजागर, रायसेन में किसान ने खुद पर पेट्रोल डालकर की आत्मदाह की कोशिश, बुरहानपुर में दिव्यांग दंपत्ति सरकारी योजनाओं से वंचित

मध्य प्रदेश में मंगलवार को हुई जनसुनवाई के दौरान अलग-अलग जिलों से ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने सिस्टम की जमीनी हकीकत उजागर कर दी। कलेक्ट्रेट परिसरों में लोग अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे, कहीं अफसरों के सामने अन्नदाता टूटकर रो पड़ा तो कहीं दिव्यांग दंपत्ति बेसहारा मदद की गुहार लगाता नजर आया।

रायसेन में जनसुनवाई के दौरान उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक किसान ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। किसान हरिसिंह अहिरवार ने लाइनमैन और जेई पर अवैध वसूली का आरोप लगाया और बताया कि सुंड क्षेत्र में उसके पिता की कृषक भूमि है, जहां वह खेती करता है। उसके मुताबिक 15 हजार रुपये के बिजली बिल में से 12 हजार जमा करने के बावजूद कनेक्शन काट दिया गया और बार-बार पैसे की मांग की जा रही है। किसान ने कहा कि अगर बिजली और पानी नहीं मिला तो फसल बर्बाद हो जाएगी और परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा। कलेक्टर से गुहार लगाने के बाद भी समाधान न मिलने से वह इतना टूट गया कि जनसुनवाई परिसर में ही पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश करने लगा, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली और एक बड़ा हादसा टल गया।

दूसरी ओर बुरहानपुर जिले के नेपनागर के ग्राम बाकड़ी से एक दिव्यांग दंपत्ति अपनी पीड़ा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। पत्नी दोनों पैरों से दिव्यांग है और पति दोनों आंखों से देख नहीं पाता। चार बेटियों के साथ यह परिवार भीख मांगकर गुजर-बसर करने को मजबूर है। पत्नी को दिव्यांग पेंशन मिल रही है, लेकिन लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं पति को किसी भी तरह की पेंशन नहीं मिल रही है और न ही पीएम आवास जैसी योजनाओं का फायदा मिला है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए दर-दर भटकने के बावजूद हर बार उन्हें कागजी औपचारिकताओं के नाम पर लौटा दिया जाता है।

जनसुनवाई में जब दंपत्ति पेंशन और योजनाओं की गुहार लेकर पहुंचे तो उन्हें ई-केवाईसी न होने का हवाला देकर वापस भेज दिया गया। पत्नी शारदा को दिव्यांग पेंशन के नाम पर महज 600 रुपये मिलते हैं, जबकि पति तेलु को किसी भी तरह की सहायता नहीं मिल रही है। गांव में चार बेटियों के साथ रहने वाला यह परिवार लाड़ली लक्ष्मी योजना से भी वंचित है। सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई जब कलेक्ट्रेट से हाइवे तक उन्हें व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं कराई गई और दोनों दिव्यांग अपने बच्चों के सहारे किसी तरह सड़क तक पहुंचे।

इस मामले में सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक दुर्गेश कुमार दुबे का कहना है कि दंपत्ति की ई-केवाईसी पूरी नहीं हो पाई है, इसलिए उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। विभाग की ओर से शिविर लगाए जाते हैं, लेकिन ये लोग वहां तक नहीं पहुंच पाते, इसी वजह से उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनसुनवाई में सामने आई ये घटनाएं सवाल खड़े करती हैं कि जब लोग आखिरी उम्मीद लेकर प्रशासन के दरवाजे तक पहुंचते हैं, तब भी अगर उन्हें इंसाफ और सहारा न मिले तो फिर भरोसा आखिर बचेगा किस पर।

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