कभी देश को दिशा देने वाला बिहार आज बीमारू क्यों कहलाता है?” — अमित शाह का बड़ा सवाल, बुद्धिजीवी सम्मेलन में गूंजा आत्ममंथन का संदेश

पटना के ज्ञान भवन में आज एक ऐतिहासिक माहौल देखने को मिला, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुद्धिजीवियों के सम्मेलन में शिरकत की। मंच से बोलते हुए उन्होंने बिहार के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाई और फिर बड़ी गंभीरता के साथ सवाल उठाया — “कभी देश को नेतृत्व देने वाला बिहार आज बीमारू राज्य क्यों कहलाता है?”

अमित शाह ने कहा कि बिहार का इतिहास हमेशा प्रेरणा देता आया है। आज़ादी से पहले से लेकर उसके बाद तक — देश के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में बिहार की भूमिका अद्भुत रही है। उन्होंने कहा — “यह वही बिहार है जिसने हमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे नेता दिए, जिन्होंने संविधान सभा की अध्यक्षता की। लोकतंत्र पर जब-जब हमला हुआ, बिहार हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा।”

लेकिन इसी बीच उन्होंने एक दर्दभरा सवाल भी उठाया — “आखिर ऐसा क्या हुआ कि वही बिहार, जिसने भारत को दिशा दी, अब विकास की दौड़ में पीछे रह गया? वह राज्य जो कभी गौरव का प्रतीक था, आज पिछड़ेपन का पर्याय क्यों बन गया?”

अपने संबोधन में गृह मंत्री अमित शाह ने ‘बदलाव की ज़रूरत’ पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि बिहार की जनता और उसके बुद्धिजीवी खुद से सवाल पूछें, आत्ममंथन करें और तय करें कि कैसा नेतृत्व बिहार को फिर से उसकी पुरानी चमक लौटा सकता है।

अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकास की गति तेज हुई है, और बिहार भी उस विकास यात्रा का हिस्सा बन सकता है — “बस ज़रूरत है सही दिशा की, सही नीतियों की और ऐसे नेतृत्व की जो बिहार को उसके गौरवशाली अतीत की ओर वापस ले जाए।”

उनका यह भाषण ना सिर्फ एक राजनीतिक संदेश था, बल्कि एक भावनात्मक अपील भी — कि बिहार अब बदलाव के लिए तैयार हो, और फिर से वही बने जो कभी पूरे देश को रास्ता दिखाता था।

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