बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत दलदला के पचामा दादर अनुसूचित क्षेत्र में दादर बॉक्साइट ब्लॉक और लौह अयस्क खनन के लिए 60 हेक्टेयर क्षेत्र में अनुमति देने की तैयारी को लेकर विरोध तेज हो गया है।
18 फरवरी को प्रस्तावित जनसुनवाई की तारीख सामने आते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और विधायक संजय उईके के नेतृत्व में 12 फरवरी को उकवा में चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया।
विधायक संजय उईके ने कहा कि बैहर विधानसभा क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां वन अधिकार कानून और पेसा एक्ट लागू है और आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी खनन गतिविधि के लिए ग्राम पंचायत की सहमति अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण और खनिज विभाग द्वारा मांगी गई आपत्तियों के दौरान सभी ग्राम पंचायतों ने खनन के खिलाफ लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी, इसके बावजूद पचामा दादर क्षेत्र में जंगल और पहाड़ियों में बॉक्साइट व लौह अयस्क खनन की मंजूरी दी जा रही है।
विधायक का आरोप है कि स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट अंग्रेजी में दी गई है और उसमें यह दर्शाया गया है कि संबंधित क्षेत्र में वन अधिकार कानून लागू नहीं है, जबकि हकीकत में यह क्षेत्र वनाधिकार कानून के अंतर्गत आता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कान्हा और पेंच कॉरिडोर से जुड़ा होने के कारण यहां वन्यप्राणियों का आवागमन और निवास होता है, प्राकृतिक जलस्रोत मौजूद हैं और वन व वन्यजीवों की संख्या भी अधिक है, लेकिन इन सभी तथ्यों को रिपोर्ट में छिपाया गया है और स्थान की जानकारी तक बदलकर प्रस्तुत की गई है।
विधायक उईके ने कहा कि आदिवासी ग्रामीणों का जीवन जंगल, जमीन और जल पर निर्भर है और उनकी रोजी-रोटी वनों से जुड़ी हुई है, ऐसे में खनन से पर्यावरण, वन्यजीव, जैव विविधता और आदिवासी जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए यह आंदोलन जारी रहेगा और वे सरकार द्वारा कथित रूप से झूठी रिपोर्ट के आधार पर दी जा रही खनन अनुमति का पुरजोर विरोध करते रहेंगे।

