लखनऊ.उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मौनी अमावस्या की घटना को लेकर सदन में चर्चा हुई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता और न ही हर कोई किसी पीठ का आचार्य बनकर मनमाने तरीके से माहौल खराब कर सकता है क्योंकि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और हम सब भारत की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हैं इसलिए हर नागरिक को कानून का पालन करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हर कोई मुख्यमंत्री या मंत्री बनकर नहीं घूम सकता वैसे ही सनातन परंपरा में भी एक व्यवस्था और मर्यादा है और शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र माना जाता है तथा मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे जिनके लिए व्यवस्था बनाई गई थी और कानून सभी के लिए समान होता है चाहे वह आम नागरिक हो या मुख्यमंत्री।
मुख्यमंत्री ने सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की जिनमें उत्तर में ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के पास है दक्षिण में श्रृंगेरी मठ है पूर्व में पुरी में गोवर्धन मठ है और पश्चिम में द्वारका में शारदा पीठ है और इन चारों पीठों का वेदों से गहरा संबंध है जिनके महावाक्य सनातन दर्शन की आधारशिला माने जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परंपरा के अनुसार किसी भी पीठ के शंकराचार्य के लिए योग्य पात्र का चयन विद्वत परिषद की मान्यता से होता है और बिना इस मर्यादा के कोई भी स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता क्योंकि इन परंपराओं का पालन ही सनातन धर्म की गरिमा को बनाए रखता है।
सदन में विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी को शंकराचार्य मानते हैं तो फिर पहले उन्हीं पर कार्रवाई क्यों की गई और क्यों एफआईआर दर्ज हुई तथा लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बीच नियम तोड़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए जिम्मेदार व्यक्ति को मर्यादा और कानून दोनों का सम्मान करना चाहिए और किसी को भी भ्रम फैलाने का अधिकार नहीं है।

