भोपाल। मध्य प्रदेश में एक प्रशासनिक आदेश को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है और कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि बोर्ड परीक्षाओं के बीच करीब 1200 शिक्षकों को भीड़ जुटाने और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में लगा दिया गया जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है और यह फैसला पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
कांग्रेस नेता भूपेन्द्र गुप्ता ने शिक्षकों को पंडाल व्यवस्था में लगाने के आदेश को तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं और ऐसे में शिक्षकों से सभा और कार्यक्रम कराना बेहद गलत है ऐसे आदेश देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इसका सीधा नुकसान छात्रों की पढ़ाई को होता है।
बताया गया कि बुरहानपुर में प्रस्तावित मुख्यमंत्री दौरे के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों प्राचार्यों और स्कूल कर्मचारियों को नेहरू स्टेडियम में भीड़ प्रबंधन और बैठक व्यवस्था की ड्यूटी सौंपी गई जिससे स्कूलों और छात्रावासों की व्यवस्था प्रभावित हुई और कांग्रेस ने इसे निंदनीय करार देते हुए कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को इस तरह हटाना बच्चों की पढ़ाई सुरक्षा और अनुशासन पर विपरीत असर डाल सकता है।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि बच्चों की परीक्षाओं और पढ़ाई में बाधा पहुंची तो पार्टी सड़कों पर उतरेगी और प्रशासन को आगाह किया कि किसी भी राजनीतिक या सरकारी कार्यक्रम की व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाए बिना की जाए जरूरत पड़े तो वैकल्पिक मानव संसाधन लगाए जाएं ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
देर रात हुए आईएएस तबादलों पर भी कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि दिन में तबादले क्यों नहीं होते और रात के अंधेरे में आदेश क्यों जारी किए जाते हैं आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि रात तीन बजे तबादलों के आदेश निकाले गए उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सब कुछ संदेह के घेरे में है।
महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ को लेकर भी कांग्रेस ने वीआईपी कल्चर पर सवाल उठाते हुए अपील की कि अगर बड़े पदों पर बैठे लोग सच में भगवान शिव के भक्त हैं तो आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर दर्शन करें ताकि किसी को परेशानी न हो और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा न हो।

