श्री महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती, साल में एक बार साकार से निराकार रूप में दर्शन

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा अनुसार सोमवार को दोपहर में भस्म आरती संपन्न हुई। यह वह विशेष अवसर होता है जब वर्ष में केवल एक बार दिन के समय भस्म आरती की जाती है। इस अनूठे दर्शन को पाने के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे और बाबा महाकाल के साकार से निराकार स्वरूप के दर्शन किए। भस्म आरती के साथ ही शिव नवरात्रि महोत्सव का विधिवत समापन भी हुआ।

महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है, लेकिन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में इसकी छटा निराली होती है। चैत्र माह में राजाधिराज महाकाल के आंगन में विवाह उत्सव की तरह महाशिवरात्रि मनाई जाती है। नौ दिनों तक चलने वाले शिव नवरात्रि महोत्सव में बाबा महाकाल का प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है। इन सभी रस्मों का उद्देश्य बाबा को दूल्हे के रूप में सजाना होता है, जैसे विवाह से पहले दूल्हे को विधि-विधान से तैयार किया जाता है, वैसे ही परंपराएं यहां निभाई जाती हैं।

महाशिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल को दूध, दही और घी से पंचामृत स्नान कराया गया। इसके पश्चात चंदन, इत्र और केसर जैसे सुगंधित द्रव्यों से लेपन किया गया। सुबह बाबा को दूल्हे की भांति सजाकर लगभग तीन क्विंटल फूलों का सेहरा बांधा गया। यही वह खास दिन होता है जब दोपहर में भस्म आरती की जाती है। आरती के बाद सजे हुए सेहरे को प्रसाद रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

भक्तजन बाबा के इस दिव्य आकर्षण में भाव-विभोर होकर प्रसाद स्वरूप मिले पुष्प और पंखुड़ियों को अपने साथ ले जाते हैं। मान्यता है कि इन पवित्र फूलों को घर में रखने से वर्षभर सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसी आध्यात्मिक उल्लास और भव्यता के साथ महाशिवरात्रि पर्व का समापन होता है, और श्रद्धालु बाबा महाकाल की कृपा का आशीर्वाद लेकर लौटते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *