नसबंदी शिविर में अव्यवस्था पर बड़ी कार्रवाई, बीएमओ हटाए गए, 173 महिलाओं के ऑपरेशन के बाद जमीन पर लिटाने का आरोप

धार। जिले के बाग में 13 फरवरी को आयोजित परिवार नियोजन नसबंदी शिविर में सामने आई अव्यवस्था और अमानवीय हालात पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगाए गए इस शिविर में 173 महिलाओं की नसबंदी किए जाने के बाद उन्हें जमीन पर लिटाने के आरोप लगे थे, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अनिता सिंगारे ने इस मामले में चार कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है, जिनमें बीएमओ वीरभद्र सिंह मुवेल और शिविर प्रभारी भी शामिल हैं। बीएमओ को तत्काल प्रभाव से हटाकर जिला मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है और वरिष्ठ कार्यालय को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

जानकारी के अनुसार इस शिविर में प्रोटोकॉल के तहत केवल 30 महिलाओं की नसबंदी की अनुमति थी, लेकिन बड़वानी से डॉक्टर को बुलाकर 173 महिलाओं के ऑपरेशन कर दिए गए। इतनी बड़ी संख्या में ऑपरेशन होने से वहां भारी अव्यवस्था फैल गई और महिलाओं की जान जोखिम में पड़ने की आशंका जताई गई। ऑपरेशन के बाद पर्याप्त बेड और सुविधाएं न होने के कारण कई महिलाओं को जमीन पर ही लिटाया गया, जिसकी तस्वीरें सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अनिता सिंगारे ने बताया कि प्रोटोकॉल स्पष्ट रूप से 30 नसबंदी का था, लेकिन तय सीमा से कहीं अधिक ऑपरेशन किए गए। उन्होंने सभी बीएमओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी शिविर में 30 से अधिक लोगों का पंजीयन और ऑपरेशन न किया जाए। साथ ही इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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