भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में रोजगार का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के जवाब में मंत्री प्रहलाद पटेल ने जो आंकड़े रखे, उन्होंने रोजगार की स्थिति पर कई सवाल खड़े कर दिए। मंत्री ने बताया कि पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी 100 दिन का पूरा रोजगार नहीं मिल पाया है।
सदन में दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक मजदूर पंजीकृत थे, लेकिन इनमें से केवल 1 लाख 23 हजार 624 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में 1 करोड़ 81 लाख से ज्यादा पंजीकृत मजदूरों में से केवल 63 हजार 898 परिवारों को पूरा रोजगार मिल सका। वर्ष 2023 में यह संख्या घटकर 40 हजार 588 परिवार रह गई। वर्ष 2024 में 30 हजार 420 परिवारों और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल पाया।
मनरेगा पोर्टल के अनुसार जॉब कार्ड धारक परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 86 लाख 65 हजार से अधिक था, जो 2025-26 में बढ़कर 98 लाख 15 हजार से ज्यादा हो गया। इसके बावजूद 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या बेहद कम रही।
सदन में यह भी बताया गया कि मनरेगा के तहत वन अधिकार पट्टा धारकों को साल में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन स्थिति यहां भी संतोषजनक नहीं है। पंजीकृत मजदूरों में 33.72 प्रतिशत आदिवासी मजदूर हैं, फिर भी कई जिलों में 150 दिन का रोजगार किसी एक परिवार तक सीमित रहा। आदिवासी जिला झाबुआ में तो यह आंकड़ा शून्य रहा। अलीराजपुर में 112 परिवारों को 150 दिन का रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा, धार, मंडला और दमोह जैसे जिलों में यह संख्या बेहद सीमित रही। इन आंकड़ों ने सदन में रोजगार को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

