जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला विवाद मामले की सुनवाई अब हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में होगी। अदालत ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड इंदौर बेंच को भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भोजशाला का स्ट्रक्चर धार जिले में स्थित है और यह क्षेत्राधिकार इंदौर बेंच के अंतर्गत आता है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया गया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार भी इस प्रकरण की सुनवाई के लिए इंदौर बेंच सक्षम है। उल्लेखनीय है कि यह मामला पहले इंदौर बेंच से जबलपुर ट्रांसफर किया गया था, क्योंकि जबलपुर में पहले से एक याचिका लंबित थी। इंदौर में लंबित चार रिट याचिकाएं भी जबलपुर भेजी गई थीं। अब अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित की गई है।
भोजशाला धार जिले में स्थित एएसआई संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हिंदू पक्ष को प्रत्येक मंगलवार को पूजा और मुस्लिम पक्ष को प्रत्येक शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति है।
बसंत पंचमी के दिन नमाज को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनती रही है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। तब सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था देते हुए कहा था कि हिंदू सुबह और शाम पूजा करेंगे, जबकि मुस्लिम पक्ष दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज अदा करेगा।
अब सभी की नजर इंदौर बेंच में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय होगी।

