भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में शिक्षकों के 1 लाख 15 हजार 678 पद रिक्त हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में कुल 2 लाख 89 हजार 5 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 1 लाख 74 हजार 419 पर शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि करीब 40 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। प्राथमिक विद्यालयों में 1 लाख 33 हजार 576 स्वीकृत पदों में से 55 हजार 626 पद रिक्त हैं। माध्यमिक विद्यालयों में 1 लाख 10 हजार 883 पदों में से 44 हजार 546 और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 44 हजार 546 में से 15 हजार 506 पद खाली हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के 83 हजार 514 विद्यालयों में से 1 हजार 968 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक है, जबकि 46 हजार 417 विद्यालयों में दो शिक्षक पदस्थ हैं। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में सबसे अधिक संख्या धार जिले में 144 है। एक शाला एक परिसर योजना के तहत 22 हजार 973 परिसरों में 49 हजार 477 शालाओं का विलय किया गया है।
स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक सामने आई है। मंत्री के अनुसार प्रदेश में 5 हजार 735 प्राथमिक विद्यालय जर्जर हालत में हैं। 1 हजार 725 विद्यालयों में बालकों के लिए और 1 हजार 784 में बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं हैं। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 75 बालक और 43 बालिका शौचालयों की कमी है। जर्जर विद्यालयों की सबसे ज्यादा संख्या झाबुआ में 618 और धार में 550 बताई गई है।
20 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों की संख्या भी बड़ी है। स्कूल शिक्षा विभाग के 11 हजार 889 विद्यालयों में कुल 1 लाख 48 हजार 817 छात्र और 23 हजार 873 शिक्षक हैं, यानी औसतन हर स्कूल में 13 विद्यार्थी और दो शिक्षक हैं। जनजातीय कार्य विभाग के 3 हजार 773 स्कूलों में 51 हजार 230 विद्यार्थी और 7 हजार 490 शिक्षक पदस्थ हैं। 20 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों की संख्या सिवनी, रायसेन, रीवा और धार जिलों में सबसे अधिक है।
शिक्षकों की भारी कमी पर मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया जारी है और आगे भी नियुक्तियां की जाएंगी। जहां जरूरत होगी वहां अतिथि शिक्षकों के माध्यम से कमी को पूरा किया जाएगा।

