भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब विधानसभा के बजट सत्र में महिलाओं और बच्चियों की गुमशुदगी को लेकर बड़े आंकड़े सामने आए। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि पिछले छह वर्षों में प्रदेश से लगभग दो लाख महिलाएं लापता हुई हैं, जिनमें करीब 65 हजार बच्चियां भी शामिल हैं।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ रहा है। इंदौर जैसे बड़े शहर से ही 20 हजार से अधिक महिलाओं के गुम होने का मामला सामने आने का दावा किया गया है, जिसने चिंता और बढ़ा दी है।
विपक्ष ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी या संगठित गिरोह से जोड़ने की आशंका भी जताई है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच ‘एपस्टीन फाइल्स’ जैसे संदर्भ देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
अब सवाल यह है कि इन गुमशुदगी के मामलों में कितने लोगों को तलाश लिया गया, कितने मामले लंबित हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है। विधानसभा में उठे इन आंकड़ों ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

