एमपी में बे-मौसम बारिश से तबाही, विधानसभा में गूंजा मुद्दा, सरकार ने सर्वे और मुआवजे का दिया आश्वासन

भोपाल। मध्य प्रदेश में अचानक हुई बे-मौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। प्रदेश के कई जिलों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे अन्नदाताओं के बीच चिंता और मायूसी का माहौल है। एमपी विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया, जिस पर सरकार ने सर्वे कराकर मुआवजा देने की घोषणा की है।

उज्जैन जिले में लगातार दूसरे दिन भी बारिश का दौर जारी रहा। सुबह से रिमझिम और कई जगह तेज बारिश दर्ज की गई। नागदा, खाचरोद, उन्हेल और महिदपुर तहसीलों में ओलावृष्टि के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मौसम में अचानक बदलाव से तापमान भी गिरा है और किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

रतलाम जिले में भी हालात गंभीर हैं। खरीफ के बाद अब रबी की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। जिले में करीब 50 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। गेहूं, चना और लहसुन की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जबकि नगरा और कांडरवासा क्षेत्र में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। धार और आसपास के इलाकों में भी बारिश से खेतों में पानी भर गया है। शुजालपुर के कालापीपल क्षेत्र में अति वर्षा से गेहूं और राईडा की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।

विधानसभा में कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि दो दिन की बारिश ने पूरे प्रदेश में फसलों को प्रभावित किया है और तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाना चाहिए। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सभी कलेक्टरों को सर्वे के निर्देश दे दिए हैं।

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि तहसीलदार और पटवारियों को खेतों में जाकर नुकसान का आकलन करने को कहा गया है। यदि 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है तो किसानों को 32 हजार रुपये और 50 प्रतिशत से कम नुकसान पर 16 हजार रुपये की राहत राशि दी जाएगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछली बार सोयाबीन नुकसान के दौरान सरकार ने दो हजार करोड़ रुपये की सहायता दी थी।

अब किसानों की नजर सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया पर टिकी है, क्योंकि बे-मौसम बारिश ने उनकी उम्मीदों को गहरा झटका दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *