लखनऊ। शासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद के बीच अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने शंकराचार्य के लखनऊ कूच के ऐलान को दादागिरी करार देते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार संत समाज को शोभा नहीं देता।
संभल में आयोजित कल्कि महोत्सव के दौरान रविंद्र पुरी महाराज ने स्पष्ट कहा कि अखाड़ा परिषद किसी भी स्थिति में शंकराचार्य के साथ नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए ‘असली या नकली हिंदू’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना अनुचित है और परिषद ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है। उनके अनुसार शंकराचार्य के साथ केवल उनके कुछ निजी समर्थक हैं, जबकि अधिकांश संत समाज सरकार के साथ है।
रविंद्र पुरी महाराज ने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के ‘महापाप’ वाले बयान का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बटुकों से जुड़े मामले में जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, फिर भी आंदोलन की घोषणा समझ से परे है।
उन्होंने यह भी कहा कि गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने को लेकर मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से वार्ता चल रही है। ऐसे में सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करना सनातन हित में नहीं है। इस बयान के बाद शंकराचार्य विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है और संत समाज की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

