भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में विकसित प्रदेश और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि सरकार विकसित मध्यप्रदेश की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने दावा किया कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में प्रदेश देश के कई राज्यों से पीछे है। कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ से भी पीछे है और सरकार केवल बड़े-बड़े दावे कर रही है। उनके मुताबिक रोजगार और निवेश को लेकर घोषणाएं तो हो रही हैं, लेकिन प्रदेश में छोटी इकाइयां बंद हो रही हैं और वित्तीय प्रबंधन की स्थिति यह है कि 33 हजार करोड़ रुपये ब्याज के रूप में चुकाए जा रहे हैं।
कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने भी बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2047 तक 22 लाख 35 हजार रुपये प्रति व्यक्ति आय का दावा लोगों को गुमराह करने जैसा है। उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों के कम वेतन, स्कूलों में संसाधनों की कमी और किसानों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट विद्यालयों और सीएम राइज स्कूलों के नाम बदले जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात नहीं सुधर रहे।
मरकाम ने मां नर्मदा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने कई घोषणाएं कीं, लेकिन एक भी पूरी नहीं हुई। दावा किया गया था कि नर्मदा के पांच किलोमीटर दायरे में शराब बिक्री बंद होगी, लेकिन गांव-गांव में शराब बिक रही है। नर्मदा परिक्रमा पथ और करोड़ों पौधारोपण के दावे किए गए, मगर धरातल पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों के कारण नर्मदा का जल कई स्थानों पर दूषित हो रहा है और डिंडोरी क्षेत्र में तो जल आचमन योग्य भी नहीं बचा।
सदन में इन मुद्दों को लेकर तीखी बहस हुई और कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर आंकड़ों के जरिए गुमराह करने का आरोप लगाया। बजट सत्र में आर्थिक विकास, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

