ग्वालियर। मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी यानी एआरटीओ भर्ती को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में सामने आया है कि 13 पदों के लिए भेजी गई मांग के बावजूद 26 अभ्यर्थियों की चयन प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। इस पर कैग ने गंभीर आपत्ति जताते हुए विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2014 में 13 पदों की मांग भेजी गई थी। परीक्षा आयोजित हुई और अगस्त 2016 में 13 अभ्यर्थियों की अनुशंसा के बाद दिसंबर 2016 में उन्हें नियुक्ति भी दे दी गई। लेकिन इसी बीच सितंबर 2014 में उन्हीं 13 पदों के लिए दोबारा मांग भेज दी गई और फिर से परीक्षा आयोजित कर दिसंबर 2016 में 13 और अभ्यर्थियों की अनुशंसा कर दी गई। इस तरह कुल 13 पदों पर 26 लोगों का चयन हो गया।
जब दूसरे बैच के अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली तो मामला कोर्ट पहुंचा। वर्ष 2018 में शासन ने पदोन्नति के 19 पदों में से 9 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी, लेकिन पूरी प्रक्रिया पर सवाल बने रहे। कैग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि मांग पत्रों की जांच और सत्यापन के लिए कोई ठोस तंत्र मौजूद नहीं था, जो एक गंभीर प्रशासनिक चूक है।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह गड़बड़ी करीब 10 साल तक सामने नहीं आई और परिवहन विभाग के स्तर पर इसे दबाए रखा गया। अब कैग की रिपोर्ट के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है।

