सिंगरौली। मध्य प्रदेश के देवसर जनपद की कठदहा पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जिला पंचायत सीईओ ने 9 फरवरी को पांच लोगों को नोटिस जारी कर 12 तारीख तक जवाब मांगा था, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है। इलाके में चर्चा है कि क्या केवल नोटिस देकर ही मामला ठंडा कर दिया जाएगा या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
आरोप है कि मजदूरों को वास्तविक काम देने के बजाय कागजों और मोबाइल एप के जरिए फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। जी राम जी की मोबाइल मॉनिटरिंग व्यवस्था का मजाक बनाते हुए रोजगार सहायक द्वारा कार्यस्थल की लाइव फोटो अपलोड करने की जगह पुरानी तस्वीरें, किसी अन्य व्यक्ति की फोटो या प्रिंटर से निकाली गई तस्वीरें अपलोड कर फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई। पोर्टल पर नाम किसी लाभार्थी का और फोटो किसी अनजान व्यक्ति की बताई जा रही है, जो केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक, मेट और सरपंच की मिलीभगत से फर्जी मस्टर रोल तैयार किए गए और शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए। सवाल उठ रहा है कि जब लगातार फर्जी अटेंडेंस और बिल भुगतान के मामले सामने आ रहे हैं तो जनपद और जिला स्तर पर अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे। क्या यह घोटाला संरक्षण में फल-फूल रहा है।
ग्रामीणों की मांग है कि कठदहा सहित आसपास की पंचायतों के मस्टर रोल की उच्च स्तरीय जांच हो, फर्जी फोटो अपलोड करने वालों को तत्काल सेवामुक्त किया जाए और गबन की गई राशि की रिकवरी की जाए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंचे। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
जब इस मामले में जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि आज छुट्टी का दिन है, मैं बयान नहीं दूंगा। अब देखना होगा कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और क्या इस कथित भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होती है।


