लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सुशासन के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि सरकारी सिस्टम ने एक जिंदा बुजुर्ग दंपति को कागजों में मृत दिखा दिया, जिसके बाद उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई। अब हालात ऐसे हैं कि दोनों अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर हैं।
पूरा मामला मोहनलालगंज तहसील से सामने आया है, जहां समाधान दिवस के दौरान बुजुर्ग दंपति जय नारायण और राम दुलारी अधिकारियों के सामने पहुंचे और अपनी आपबीती सुनाते हुए रो पड़े। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिस्टम की एक बड़ी लापरवाही ने उनकी जीवनरेखा मानी जाने वाली पेंशन रोक दी।
अधिकारियों की ओर से अब जांच रिपोर्ट तलब किए जाने और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, लेकिन सवाल यही है कि आखिर किसी जिंदा इंसान को रिकॉर्ड में मृत कैसे घोषित कर दिया गया। क्या बिना सत्यापन के कागजों में नाम काट दिए जाते हैं?
यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की चूक सामने आई हो। इससे पहले भी प्रदेश में ऐसे मामले उजागर हो चुके हैं, जहां लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। अब देखने वाली बात यह है कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा।

