अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर जबलपुर में निकला कैंडल मार्च, शिया समुदाय ने ईरान पर हमलों का किया विरोध

जबलपुर। ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद मध्यप्रदेश के Jabalpur में शिया समुदाय द्वारा कैंडल जुलूस निकाला गया। इस कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में शिया मुस्लिम पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि दी और ईरान पर हुए हमलों के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान जुलूस में “खामेनेई साहब जिंदाबाद” और “ईरान से ये सदा आई, शिया सुन्नी भाई-भाई” जैसे नारे भी लगाए गए।

जुलूस में शामिल लोगों ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को मजलूमों पर जुल्म बताते हुए कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने इन हमलों को मानवता के खिलाफ बताया और कहा कि शिया समुदाय हमेशा जुल्म और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाता रहेगा।

कैंडल मार्च में शामिल मुस्लिम समाज के पदाधिकारियों ने भारत सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को युद्ध रोकने के लिए पहल करनी चाहिए और प्रभावित लोगों तक दवाइयों और जरूरी सामान की मदद पहुंचाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

मौलाना सैय्यद उरूज अली ने कहा कि यह कैंडल मार्च जुल्म और अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए निकाला गया है। उन्होंने कहा कि किसी अच्छे इंसान को मारा जा सकता है, लेकिन उसकी अच्छाई और उसकी यादों को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से अपील की कि युद्ध को रोकने और शांति स्थापित करने के लिए प्रयास किए जाएं।

वहीं इरफान उल हक ने कहा कि आज लोग उस शख्सियत के गम में यह कैंडल मार्च निकाल रहे हैं जिसे अमेरिका और इजरायल की बमबारी में शहीद किया गया। उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई हमेशा गाजा के मजलूमों के साथ खड़े रहे और इसी कारण उन पर हमला किया गया। उन्होंने भारत सरकार से उम्मीद जताई कि भारत एक गुटनिरपेक्ष राष्ट्र की भूमिका निभाते हुए इस संकट में सकारात्मक पहल करेगा।

यह कैंडल जुलूस जबलपुर के फूटाताल इलाके में स्थित मस्जिद जाकिर अली से शुरू हुआ और शहर के कई मार्गों से होते हुए गलगला स्थित इमामबाड़े पर समाप्त हुआ। यह विशाल कैंडल मार्च अंजुमन निदा-ए-इस्लाम के बैनर तले आयोजित किया गया था।

गौरतलब है कि Ali Khamenei की मौत के बाद ईरान में 40 दिन के राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की गई थी। वहीं उनकी मृत्यु के करीब दस दिन बाद Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर चुना गया।

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