विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नए नियमों को लेकर देश और प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच गोंडा से बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण शरण सिंह का तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने इन नियमों को इतिहास के दोहरे मापदंड बताते हुए कहा है कि एक वर्ग को लगातार ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में पेश किया जा रहा है और उसे निशाना बनाया जा रहा है।
प्रतीक भूषण शरण सिंह ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को तो ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है, लेकिन भारतीय समाज के एक वर्ग को लगातार ऐतिहासिक अपराधी बताकर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।
दरअसल, उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के नाम पर UGC द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026’ को लेकर पूरे देश में विरोध हो रहा है। ये नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे और 15 जनवरी से लागू हो गए, लेकिन इसके बाद से यह मामला केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के लिए बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। UGC का कहना है कि ये नियम 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन फ्रेमवर्क को और मजबूत करने के लिए लाए गए हैं।
नए नियमों के तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में इक्विटी कमेटी, इक्विटी स्क्वॉड और इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेल का गठन अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही SC, ST और OBC छात्रों व कर्मचारियों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों पर त्वरित जांच, 24 घंटे की हेल्पलाइन, नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग का प्रावधान किया गया है। नियमों में यह भी कहा गया है कि यदि भेदभाव साबित होता है तो संस्थान की फंडिंग रोकी जा सकती है, कोर्स या डिग्री पर रोक लग सकती है या UGC की मान्यता तक रद्द की जा सकती है। इसी प्रावधान को लेकर अब देशभर में तीखी राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ी हुई है।

