वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और सनातन परंपराओं की विश्वविख्यात नगरी काशी एक बार फिर भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता का जीवंत उदाहरण बनी है। वाराणसी के पावन गंगा घाट पर एक विदेशी जोड़े ने पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाजों और वैदिक परंपराओं के अनुसार विवाह रचाया और अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेकर सात जन्मों तक साथ निभाने की सौगंध ली। इस खास मौके पर दोनों ने कहा कि ऐसी शादी का सपना उन्होंने लंबे समय से देखा था।
गंगा मैया को साक्षी मानकर संपन्न हुए इस विवाह में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पारंपरिक हिंदू विवाह संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ किए गए। दूल्हा और दुल्हन भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए, जिससे यह विवाह और भी भव्य, भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध दिखाई दिया। गंगा घाट पर इस अनोखे विवाह को देखने के लिए स्थानीय लोग, श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में जमा हो गए।
मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से पूरा घाट आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। मौजूद लोगों ने इस दृश्य को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता का प्रतीक बताया। यह विवाह न सिर्फ काशी की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय परंपराएं और संस्कार आज भी विश्वभर के लोगों को गहराई से आकर्षित कर रहे हैं।

