बिहार में लोकतंत्र के साथ हुआ बहुत बड़ा अन्याय, वोट खरीदने का आरोप, बोले – पहली बार ऐसा हुआ…

बिहार चुनाव खत्म हो चुके हैं, नतीजे सामने आ चुके हैं और नई सरकार ने शपथ भी ले ली है। लेकिन इसी बीच एक ऐसी आवाज उठी है जिसने पूरे चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है। जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर, जो दो साल से लगातार गांव–गांव पैदल चलकर लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहे थे, वो अब चुनावी नतीजों के बाद बेहद गंभीर आरोप लगाते दिखे। पीके का कहना है कि बिहार में इस बार लोकतंत्र के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया गया है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि हमने सिर्फ कुछ लोगों के साथ शुरू किया था, लेकिन दो साल में जनसुराज लाखों लोगों का परिवार बन गया। लोगों में उम्मीद जागी कि बिहार सच में बदल सकता है। लेकिन इस बार लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट देने का अधिकार नहीं मिला। पहली बार ऐसा हुआ है कि गरीब लोगों का वोट पैसों में खरीद लिया गया। यह सिर्फ किसी पार्टी की हार–जीत का सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र के असली मूल्य का बड़ा नुकसान है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोग अपनी मर्जी से वोट ही नहीं दे पाए, तो फिर चुनाव का मतलब क्या रह जाता है? लोकतंत्र का असली आधार ही खत्म हो जाता है। पीके के इस बयान ने पूरे राजनीतिक माहौल में नई बहस छेड़ दी है।

इसी आरोप के ठीक एक दिन पहले प्रशांत किशोर पूरी रात और पूरा दिन मौन व्रत पर बैठे रहे। पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम में उन्होंने 24 घंटे का मौन उपवास किया और पार्टी की हार पर आत्ममंथन भी किया। उनकी मौन साधना की तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें पीके बेहद शांत लेकिन गहरे चिंतन में डूबे दिखे।

पीके का कहना है कि वे लड़ाई छोड़ने वालों में से नहीं हैं। अगर लोकतंत्र के साथ अन्याय हुआ है तो इसे ठीक करने के लिए लड़ाई और मजबूत होगी। बिहार में जो हुआ, वो सिर्फ एक चुनाव का परिणाम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर एक गंभीर सवाल है, जिसका जवाब पूरे राज्य को ढूंढना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *