तनाव भरे दौर में राहत की पहल: प्रोफेसरों को सिखाए जा रहे स्ट्रेस मैनेजमेंट और टीम बिल्डिंग के गुर

शहडोल। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव हर व्यक्ति की बड़ी चुनौती बन चुका है, और जब बात कार्यस्थल की हो तो दबाव, टकराव और जिम्मेदारियों का बोझ और भी बढ़ जाता है। ऐसे माहौल में शहडोल जिले के पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय में शिक्षकों के लिए एक खास पहल की गई है, जहां प्रधानमंत्री उषा यानी PM-USHA योजना के तहत फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में लगभग 60 प्रोफेसर और अकादमिक स्टाफ हिस्सा ले रहे हैं। यहां उन्हें स्ट्रेस मैनेजमेंट, कॉन्फ्लिक्ट हैंडलिंग और टीम बिल्डिंग जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञों से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन CRISP भोपाल के सहयोग से किया जा रहा है, जहां हैंड्स-ऑन सेशन के जरिए प्रभावी संवाद, नेतृत्व क्षमता और इमोशनल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया जा रहा है।

इस कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर राम शंकर और कुलसचिव सरिता चौहान की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। पहल का उद्देश्य केवल शिक्षकों को तनावमुक्त करना नहीं, बल्कि उनकी व्यवहारिक दक्षता और संवाद क्षमता को मजबूत बनाना है, ताकि वे विद्यार्थियों के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार कर सकें।

विषय विशेषज्ञ डॉ. स्मृति मिश्रा ने योग और संतुलित आहार के माध्यम से मानसिक तनाव को नियंत्रित करने के उपाय बताए, वहीं डॉ. के.के. पटेरिया ने व्यक्तित्व विकास और कार्यस्थल पर होने वाले विवादों को सकारात्मक ढंग से संभालने के गुर साझा किए। इसके अलावा अंकुर कुमार गौर ने साइकोमेट्रिक तकनीकों के जरिए ह्यूमन बिहेवियर एनालिसिस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि व्यक्तित्व के विभिन्न प्रकारों को समझकर टीमवर्क को और बेहतर बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम की नोडल ऑफिसर डॉ. रचना दुबे ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के बीच आपसी समन्वय और टीम भावना को मजबूत करना है, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में सकारात्मक कार्य संस्कृति विकसित हो सके। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए बेहतर और संतुलित शैक्षणिक माहौल तैयार करने की ओर भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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