टीकमगढ़। औलाद की सलामती के लिए एक पिता किस हद तक जा सकता है, इसकी मिसाल महाराष्ट्र के अमरावती निवासी देवीदास दे रहे हैं। भीषण ठंड के बीच देवीदास सड़क मार्ग से लुढ़कते हुए माता वैष्णो देवी के दरबार की कठिन यात्रा पर निकले हैं। यह सफर वे अपनी बेटी की जान बचने की मन्नत पूरी करने के लिए कर रहे हैं।
दरअसल, देवीदास की बेटी को कुछ समय पहले तेज करंट लग गया था, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी। डॉक्टरों ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे कठिन समय में एक बेबस पिता ने माता वैष्णो देवी से प्रार्थना की थी कि अगर उसकी बेटी की जान बच गई तो वह उनके दरबार में लुढ़कते हुए हाजिरी लगाएगा।
माता के चमत्कार से न सिर्फ बेटी की जान बची, बल्कि प्लास्टिक सर्जरी के बाद वह सामान्य जीवन जीने लगी। इसके बाद देवीदास ने अपनी मन्नत पूरी करने का संकल्प लिया और अमरावती से लुढ़कते हुए वैष्णो देवी यात्रा पर निकल पड़े।
आज यह यात्रा मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से होकर गुजर रही है, जहां तक देवीदास करीब 850 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। अभी उन्हें लगभग 1200 किलोमीटर की दूरी और तय करनी है, जिसे पूरा करने में करीब 60 दिन लगेंगे।
देवीदास के साथ इस यात्रा में उनका एक साथी भी है, जो साइकिल से उनके साथ चलता है और उसी साइकिल पर जरूरत का सारा सामान रखा जाता है। लुढ़कते समय देवीदास के हाथों और पैरों में लोहे की चैन की बेड़ियां बंधी रहती हैं। वे रोजाना करीब 12 किलोमीटर का सफर लुढ़कते हुए तय करते हैं और सुरक्षित जगह मिलने पर वहीं विश्राम करते हैं, फिर सुबह होते ही आगे बढ़ जाते हैं।
बेटी की प्राण रक्षा के लिए लिया गया यह कठिन प्रण और पिता का अटूट जज्बा समाज के लिए एक प्रेरणा है, खासकर उन लोगों के लिए जो आज भी बेटियों से ज्यादा बेटों को महत्व देते हैं।

