नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम केंद्रीय जेल से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही एक महिला बंदी ने अस्पताल ले जाते समय जेल वाहन में ही समय से पहले एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन जन्म के करीब 10 घंटे बाद नवजात की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक महिला बंदी नर्मदापुरम केंद्रीय जेल में अपने पति के साथ 16 अगस्त 2017 से हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही थी और दोनों शाहगंज, जिला सीहोर के निवासी हैं, पिछले चार वर्षों से दोनों को पैरोल का लाभ मिलता रहा है और 6 अगस्त से 21 अगस्त 2025 तक दोनों पैरोल पर जेल से बाहर गए थे, इसी दौरान महिला गर्भवती हुई थी।
जेल प्रशासन के अनुसार नियमों के तहत महिला की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जा रही थी और टारगेट सोनोग्राफी में नवजात में मानसिक विकृति पाए जाने की जानकारी सामने आई थी, राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड से प्रसव की अनुमति मिलने के बाद महिला को एक सप्ताह पहले भोपाल से नर्मदापुरम जेल शिफ्ट किया गया था।
मंगलवार सुबह अचानक महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद उसे जेल से अस्पताल ले जाया जा रहा था, इसी दौरान जेल वाहन में ही उसने बच्ची को जन्म दिया, बाद में मां और नवजात दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर शाम बच्ची ने दम तोड़ दिया।
नियमों के अनुसार नवजात जेल अभिरक्षा में माना जाता है, इसलिए पूरे मामले में न्यायिक जांच और पोस्टमार्टम जरूरी होता है, तहसीलदार सरिता मालवीय की मौजूदगी में नवजात के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है, कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच जारी है।

