बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में निजी स्कूल भवन पर हुई बुलडोजर कार्रवाई का मामला अब सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। इस कार्रवाई को लेकर देश के कई बड़े नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एआईएमआईएम प्रमुख अससुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और सांसद सुप्रिया सुले ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
एआईएमआईएम प्रमुख अससुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘अब्दुल’ की गलती यह नहीं है कि उनका स्कूल गैरकानूनी है, क्योंकि उनके पास स्कूल से जुड़े तमाम कागजात मौजूद हैं। ओवैसी ने कहा कि असली गलती यह है कि वे भारतीय मुसलमान हैं और गरीब, गैर मजहबी हमवतन के लिए उनके दिल में हमदर्दी है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रशासन ऊपर से दबाव की बात कहकर स्कूल पर बुलडोजर चला रहा है। उन्होंने पूछा कि यह कैसा प्रदेश है, जहां एक मुसलमान अगर स्कूल बनवाता है तो शिक्षा के मंदिर को ही तोड़ दिया जाता है। इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा कि पीएम मोदी देखिए, आपके मुख्यमंत्री का प्रशासन क्या कर रहा है।
दरअसल पूरा मामला बैतूल जिले के भैंसदेही ब्लॉक के ग्राम धाबा का है, जहां अब्दुल नईम नामक व्यक्ति ने अपनी निजी जमीन पर अपने खर्च से एक स्कूल भवन का निर्माण कराया था। इसी बीच कुछ लोगों ने अफवाह फैला दी कि यहां मदरसा बनाया जा रहा है, जो बाद में जांच में गलत साबित हुई। बावजूद इसके प्रशासन ने भवन निर्माण की अनुमति नहीं लिए जाने का हवाला देते हुए स्कूल भवन के एक हिस्से को गिरा दिया और निर्माण कार्य रुकवा दिया।
इस मामले में पंचायत के दोहरे रवैये की भी बात सामने आई है। पंचायत ने पहले अब्दुल नईम को अवैध निर्माण का नोटिस दिया और बाद में खुद सरपंच ने भवन निर्माण के लिए एनओसी भी जारी कर दी। इसी दौरान कुछ शरारती तत्वों ने गांव में मदरसा बनाए जाने की अफवाह फैलाई। प्रशासन की जांच में यह साफ हुआ कि मदरसा बनाने का दावा गलत था, लेकिन यह सही पाया गया कि स्कूल भवन के लिए विधिवत प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी।
कार्रवाई के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने सफाई देते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई पंचायत स्तर पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण की अनुमति नहीं होने के कारण पंचायत ने यह कदम उठाया है और जिला प्रशासन पंचायत को कार्रवाई रोकने का आदेश नहीं दे सकता। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है।

