देवास/इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में 14 मौतों को लेकर शुरू हुई सियासत अब प्रशासनिक गलती के चलते बड़े विवाद में बदल गई है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान को अमानवीय बताने वाले शब्द जैसे ही सरकारी आदेश में नजर आए, प्रशासन में हड़कंप मच गया और आखिरकार SDM को निलंबित कर दिया गया।
दरअसल, कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान के विरोध में प्रदर्शन की अनुमति के लिए जो आवेदन दिया था, वही भाषा बिना पढ़े-समझे सरकारी आदेश में तब्दील हो गई। SDM के रीडर ने कांग्रेस की अर्जी को हूबहू कॉपी कर आदेश बना दिया। नतीजा यह हुआ कि आदेश में कांग्रेस के आरोप, राजनीतिक शब्दावली और यहां तक कि यह दावा भी शामिल हो गया कि भाजपा शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए मल-मूत्र युक्त पानी से 14 लोगों की मौत हुई है और मंत्री का बयान अमानवीय और निरंकुश है।
हैरानी यहीं खत्म नहीं हुई। आदेश में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नाम के आगे सम्मान सूचक ‘श्री’ तक नहीं लगाया गया, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम के आगे पूरा सम्मान सूचक शब्द लिखा गया। इतना ही नहीं, कांग्रेस के आवेदन में भाजपा सांसदों और विधायकों के घरों के सामने “घंटा बजाकर विरोध” करने की बात थी, वही लाइन सरकारी आदेश में भी शामिल कर दी गई, जिससे साफ हो गया कि आवेदन ही आदेश बन गया।
जैसे ही यह आदेश सामने आया, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना और देवास के SDM आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही आदेश तैयार करने वाले रीडर पर भी कार्रवाई की गई है, जिसके बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

