कथित संत हर्षा रिछारिया का चौतरफा विरोध, संतों का तीखा हमला, लोगों में भारी आक्रोश

भोपाल। कथित संत हर्षा रिछारिया के खिलाफ मध्य प्रदेश के साधु-संतों का विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी, महंत स्वामी अनिलानंद महाराज और जगत गुरु स्वामी राघव देवाचार्य ने हर्षा रिछारिया पर तीखे शब्दों में हमला बोला है। संत समाज में इसे सनातन धर्म का अपमान बताया जा रहा है और लोगों के बीच भी जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है।

महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा कि संन्यास कोई भटा-भाजी नहीं है जिसे कोई भी खरीद ले। कपड़े पहन लेने या रंग लेने से कोई संन्यासी नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि हर्षा रिछारिया अनर्गल बयान दे रही हैं और वह कभी संन्यासी रही ही नहीं। फिल्मी दुनिया से नाचते-गाते आ जाने से संन्यास नहीं मिलता। जब मन में त्याग और वैराग्य का भाव ही न हो तो संन्यास का दावा करना ढोंग है। उन्होंने यह भी कहा कि हर्षा रिछारिया को निरंजनी अखाड़े से पहले ही हटाया जा चुका है।

जगत गुरु स्वामी राघव देवाचार्य ने कहा कि हर्षा रिछारिया कोई संत नहीं है और ग्लैमर की दुनिया से आई लड़की को बिना पूरी जांच-पड़ताल के दीक्षा दे दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संन्यास लिया था तो उधारी और कमाई की बात क्यों सामने आई। स्वामी राघव देवाचार्य ने कहा कि पूरे देश के अखाड़ों के संत मिलकर ऐसे लोगों के खिलाफ अखिल भारतीय स्तर पर पत्र जारी करेंगे और जरूरत पड़ी तो सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

स्वामी राघव देवाचार्य ने यह भी कहा कि हर्षा रिछारिया जैसे लोग संत समाज को भ्रमित कर रहे हैं। साधु कमाने के लिए नहीं, त्याग और तपस्या के लिए होता है। हर्षा के आचरण में न त्याग दिखा और न तपस्या। ऐसे लोग सिर्फ सम्मान और पहचान पाने के लिए धर्म का सहारा लेते हैं, जिसे संत समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

अखिल भारतीय संत समिति के कार्यकारी अध्यक्ष महंत स्वामी अनिलानंद महाराज ने कहा कि धर्म पर चलना बहुत कठिन है और ढोंग करना सबसे आसान। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में धर्म पर चलने का संकल्प लेने के बाद अब पीछे हटने की बातें की जा रही हैं। धर्म कोई कमाई का साधन नहीं है। हर्षा रिछारिया को धर्मरूपी महल में रहने का अधिकार नहीं है और वह गोबर के कीड़े की तरह हैं जो सनातन की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

हर्षा रिछारिया के बयानों को लेकर आम लोगों में भी भारी आक्रोश है। जबलपुर के लोगों का कहना है कि यह संतों की भाषा नहीं हो सकती। फिल्मी दुनिया में पहचान नहीं मिली तो संत बनने का रास्ता चुना गया और अब यहां भी नाम और पैसा नहीं मिला तो धर्म छोड़ने की बातें की जा रही हैं। वहीं ग्वालियर के लोगों ने कहा कि ऐसे लोग धर्म का चोला सिर्फ फेमस होने और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए ओढ़ते हैं और ऐसे अवसरवादियों का बहिष्कार होना चाहिए।

गौरतलब है कि महाकुंभ 2025 के दौरान चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने हाल ही में धर्म की राह छोड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया, फिर भी बार-बार उन्हें रोका गया और मानसिक रूप से तोड़ा गया। लेकिन अब उनके इस फैसले के बाद संत समाज और आम जनता का विरोध और तेज होता नजर आ रहा है।

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