वाराणसी. वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में रेप के मामले में सजा काट रहे आसाराम के दर्शन को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि बलात्कार के दोषी आसाराम को मंदिर में वीआईपी प्रोटोकॉल दिया गया और भारी सुरक्षा के बीच दर्शन कराए गए। इस घटना के सामने आने के बाद भाजपा सरकार और प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि आसाराम इन दिनों स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए छह महीने की जमानत पर जेल से बाहर है। पिछले तीन दिनों से वह वाराणसी में ठहरा हुआ था और रविवार की शाम काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचा। इस दौरान वह गेट नंबर चार से मंदिर परिसर में दाखिल हुआ। आरोप है कि उसे वीआईपी प्रोटोकॉल के तहत प्रवेश दिया गया और लगभग पचास से अधिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उसे मंदिर तक ले जाया गया। इस दौरान आसाराम व्हीलचेयर पर बैठा नजर आया।
मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन की ओर से सफाई दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी तरह का वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं दिया गया था, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह के हंगामे या विवाद से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। उनका कहना है कि भीड़ और संभावित विरोध को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया था।
गौरतलब है कि आसाराम को नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए 2018 में जोधपुर की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा एक महिला शिष्या के यौन उत्पीड़न के मामले में भी गुजरात की अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा दी थी। इन मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद वह लंबे समय से जेल में सजा काट रहा है।
हालांकि स्वास्थ्य कारणों के आधार पर उसे कई बार अस्थायी जमानत मिल चुकी है। जानकारी के मुताबिक अक्टूबर से अब तक वह कई बार जमानत पर जेल से बाहर आ चुका है। इस बीच वाराणसी में मंदिर दर्शन के दौरान मिली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस छिड़ गई है और पूरे मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

