भोपाल। राजधानी भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़े 26 टन गोमांस मामले ने प्रशासन और राजनीति दोनों में हड़कंप मचा दिया है। नगर निगम प्रशासन ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें टेंडर की शर्तों से लेकर स्लॉटर हाउस के आवंटन, संचालन और कमिश्नर के हस्ताक्षर तक हर कड़ी की बारीकी से जांच की जाएगी।
यह मामला दिसंबर 2025 में उस वक्त सामने आया, जब पुलिस मुख्यालय के सामने एक ट्रक से 26 टन मांस जब्त किया गया। लैब जांच में इस मांस के गोमांस होने की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि यह मांस जिंसी स्थित उस आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़ा है, जिसे भोपाल नगर निगम ने पीपीपी मॉडल पर लाइवस्टॉक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड को मात्र 4 लाख रुपये सालाना किराए पर दिया था। इस स्लॉटर हाउस का संचालन असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा कर रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। वेटनरी डॉक्टर समेत कुल 9 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। असलम चमड़ा के आदमपुर स्थित रेंडरिंग प्लांट को सील कर दिया गया है और स्लॉटर हाउस संचालित करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए शासन स्तर के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय कमिटी गठित करने की तैयारी की जा रही है।
गौरतलब है कि यह आधुनिक स्लॉटर हाउस करीब 100 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर 33 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। यहां केवल भैंसों की कटाई की अनुमति थी, लेकिन आरोप है कि इसी आड़ में गोमांस की सप्लाई कर बड़े पैमाने पर गोकशी का नेटवर्क चलाया जा रहा था। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले को भाजपा शासित नगर निगम और सरकार की मिलीभगत बताया है।
वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने साफ कहा है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा और सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम परिषद की बैठक में भी इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। महापौर मालती राय और निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने दोषियों पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
फिलहाल भोपाल का स्लॉटर हाउस पूरी तरह सील है और जांच जारी है। यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक भावनाओं से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दा बन चुका है।

