बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नज़दीक आते ही सियासी पारा तेज़ी से चढ़ रहा है। नेताओं के बयान अब सीधे वोटरों के दिल तक पहुँच रहे हैं — और इसी बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक बयान ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छठ महापर्व पर की गई उनकी टिप्पणी अब कानूनी दायरे में पहुंच गई है।
मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय में अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने राहुल गांधी के खिलाफ परिवाद दायर किया है। ओझा का कहना है कि 29 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर के सकरा विधानसभा क्षेत्र में राहुल गांधी ने एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और छठ पर्व को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की। शिकायत में मांग की गई है कि अदालत राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत मुकदमा चलाने और गिरफ्तारी का आदेश दे।
शिकायत के मुताबिक, राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा था — “चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री मोदी कुछ भी कर सकते हैं, अगर आप कहेंगे तो वो मंच पर नाचने लगेंगे। चुनाव खत्म होते ही वो गायब हो जाएंगे। छठ पर्व पर मोदी जी सिर्फ ड्रामा कर रहे हैं।” इस बयान को लेकर हिंदू समाज में नाराज़गी फैल गई है। लोगों का कहना है कि छठ पर्व बिहार की अस्मिता और आस्था का प्रतीक है, और इस पर की गई ऐसी टिप्पणी धार्मिक भावनाओं को आहत करती है।
भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को हिंदू विरोधी बताया है और कांग्रेस पर आस्था का अपमान करने का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस की ओर से कहा गया कि राहुल गांधी का बयान राजनीतिक व्यंग्य था, जिसे तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद कांग्रेस के लिए चुनावी माहौल में नई परेशानी बन सकता है, खासकर उस वक्त जब बिहार में आस्था और परंपरा की गहरी जड़ें हैं।
अब सबकी निगाहें मुजफ्फरपुर कोर्ट पर टिकी हैं — क्या अदालत राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देगी या मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा? बिहार की सियासत में यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।

