पटना। बिहार चुनाव 2025 की तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है… और रुझानों में एनडीए ने ऐसा दबदबा बनाया है कि मुकाबला एकतरफा नजर आ रहा है। 243 में से 202 सीटों पर एनडीए आगे है, जबकि महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट रहा है। यह साफ दिख रहा है कि 2020 के मुकाबले एनडीए को 65 से ज्यादा सीटों का जबरदस्त फायदा मिल रहा है और राज्य में क्लीन स्वीप जैसे हालात हैं।
सबसे बड़ा उछाल जेडीयू के खाते में देखा जा रहा है। पिछली बार 43 सीटों पर रुकने वाली जदयू इस बार 75 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। ऐसे में यह लगभग पक्का माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। भाजपा भी 90 सीटों पर लीड के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है।
महागठबंधन की बात करें तो तस्वीर काफी निराशाजनक है। राजद सिर्फ 27 सीटों पर आगे है, कांग्रेस 61 सीटों पर लड़ने के बावजूद केवल 4 सीटों पर बढ़त ले पाई है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और मुकेश सहनी की पार्टी अभी भी खाता नहीं खोल पाई हैं।
बड़े चेहरों का हाल भी काफी चौंकाने वाला है। तेजस्वी यादव राघोपुर से पीछे चल रहे हैं और तेजप्रताप भी महुआ से पिछड़ रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी तारापुर से लगातार मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। काराकाट से पवन सिंह की पत्नी भी पीछे चल रही हैं।
इस बार बिहार में 67.10% मतदान हुआ है, जो पिछले चुनावों से लगभग 10% ज्यादा है—और इसे एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इसी बीच जदयू ने अपने सोशल मीडिया पर “नीतीश मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे” का पोस्ट डाला था, जिसे कुछ देर बाद हटा लिया गया। लेकिन रुझान बता रहे हैं कि बिहार की सत्ता एक बार फिर एनडीए की झोली में जाती दिख रही है।

