Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रंग अब और भी दिलचस्प हो गया है। आरजेडी इस बार पुराने ढर्रे से हटकर एक नया राजनीतिक खेल खेलती नज़र आ रही है। पार्टी नेता तेजस्वी यादव अब सिर्फ अपने पारंपरिक वोट बैंक पर नहीं, बल्कि उन जातियों की ओर भी हाथ बढ़ा रहे हैं, जिनसे कभी आरजेडी की दूरी रही थी — और इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं भूमिहार वोटर।
तेजस्वी यादव की रणनीति साफ है — वो आरजेडी को अब सिर्फ एक जाति की पार्टी नहीं, बल्कि “ए टू ज़ेड पार्टी” बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि भले ही भूमिहार समाज की संख्या बहुत बड़ी न हो, लेकिन बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में इनकी भूमिका बेहद अहम रहती है।
इसी सोच के तहत आरजेडी ने हाल के सालों में कई बड़े कदम उठाए हैं। एमएलसी टिकट से लेकर विधानसभा प्रत्याशी तक, पार्टी ने भूमिहार नेताओं को अहमियत देकर साफ संकेत दे दिया है कि अब आरजेडी सबको साथ लेकर चलना चाहती है। इंजीनियर सौरभ, कार्तिक मास्टर और अजय सिंह जैसे नाम इसी बदलाव का सबूत हैं।
कार्तिक मास्टर, जो कभी बाहुबली अनंत सिंह के करीबी माने जाते थे, अब पूरी तरह तेजस्वी के भरोसेमंद नेता हैं। वहीं इंजीनियर सौरभ और अजय सिंह भी पार्टी के रणनीतिक चेहरे बन चुके हैं।
तेजस्वी ने अपने विरोधियों के खेमे में भी सेंध लगा दी है। जेडीयू विधायक डॉ. संजीव कुमार, जिन्होंने 2024 में नीतीश सरकार के खिलाफ बगावत की थी, अब आरजेडी के टिकट पर परबत्ता से चुनाव मैदान में हैं। वहीं बरबीघा के विधायक सुदर्शन सिंह भी नीतीश से नाराज़ हैं और संभव है कि वो निर्दलीय लड़ें — जिससे जेडीयू को सीधा नुकसान हो सकता है।
सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक तब आया, जब वैशाली के बाहुबली नेता मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को लालगंज सीट से टिकट दिया गया। इसके अलावा पूर्व एलजेपी नेता सूरजभान सिंह ने भी पारस गुट छोड़कर आरजेडी का दामन थाम लिया। उनकी पत्नी को मोकामा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है — जहां उनका मुकाबला अनंत सिंह से होगा।
इन सारे कदमों से यह साफ दिख रहा है कि तेजस्वी यादव ने इस बार सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि समीकरण बदलने का खेल शुरू कर दिया है। भूमिहार वोट बैंक को साधने की यह रणनीति एनडीए के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है और बिहार की सियासत में नया समीकरण खड़ा कर सकती है।

