बिहार में नई एनडीए सरकार ने शपथ तो ले ली है, लेकिन असली राजनीति अब शुरू हुई है। सबसे बड़ी हलचल इस बात को लेकर है कि विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी किसके पास जाएगी। यह चुनाव जितना दिलचस्प था, उतनी ही दिलचस्प अब कुर्सियों की यह जंग हो चुकी है।
नीतीश कुमार ने इस बार एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने पूरे कार्यकाल में पहली बार गृह विभाग खुद से अलग कर दिया है और यह अहम मंत्रालय अब बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास है। लेकिन गृह विभाग के बदले जदयू किसी भी कीमत पर विधानसभा अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार नहीं दिखाई दे रही। जदयू नेताओं का तर्क साफ है—जब विधान परिषद के सभापति पद पर पहले से ही बीजेपी के अवधेश नारायण सिंह हैं, तो विधानसभा अध्यक्ष का पद जदयू को ही मिलना चाहिए।
उधर बीजेपी भी अपने दावे को कमजोर नहीं होने देना चाहती। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार का नाम सबसे आगे चल रहा है, जबकि चर्चा में रेणु देवी का नाम भी लगातार उठ रहा है। दोनों ही नेता अनुभवी हैं, और अगर स्पीकर की कुर्सी भाजपा के खाते में जाती है, तो मुकाबला काफी दिलचस्प हो जाएगा।
वहीं जदयू की ओर से 8 बार के विधायक और वर्तमान उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है। राजनीति के पुराने खिलाड़ी नरेंद्र नारायण यादव को जदयू अध्यक्ष की कुर्सी का परफेक्ट विकल्प बता रही है।
अब सारा ध्यान 26 से 28 नवंबर के बीच होने वाले विधानसभा के विशेष सत्र पर टिक गया है। इसी दौरान 243 नवनिर्वाचित विधायक शपथ लेंगे और राज्यपाल प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति करेंगे। इसके बाद सबसे बड़ा फैसला लिया जाएगा—बिहार विधानसभा अध्यक्ष कौन होगा?
अगला हफ्ता बिहार की सियासत का सबसे अहम मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि कुर्सी भले एक हो, पर दावेदार दोनों तरफ से जबरदस्त हैं।

