भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में उस वक्त माहौल गरमा गया जब बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने ग्वालियर जिले के राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में हुई भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा और तत्काल जांच कर भर्ती निरस्त करने की मांग की।
कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने जवाब देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हुई है। विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार लिए गए, किसी बैठक में आपत्ति दर्ज नहीं की गई और अब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।
लेकिन कुशवाहा यहीं नहीं रुके। उन्होंने सवाल उठाया कि चार साल बाद भर्ती क्यों की गई, शासन से अनुमति क्यों नहीं ली गई और 26 पद दो दिन के भीतर कैसे भर दिए गए। उन्होंने कहा कि जब हम तीन-तीन विधानसभा सदस्य आपत्ति जता चुके थे तो फिर यह प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी। यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है। उन्होंने पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग दोहराई।
मंत्री कंसाना ने फिर कहा कि भर्ती नियमों के अनुसार हुई है, लेकिन कुशवाहा ने पलटवार करते हुए कहा कि 2022 में भर्ती होनी थी, 2026 में कैसे कर दी गई और सही जवाब नहीं दिया जा रहा, केवल लीपापोती की जा रही है।
इसी बीच सदन में एक और मुद्दे पर हंगामा शुरू हो गया। अमरपाटन से कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने महात्मा गांधी को लेकर टिप्पणी की और बीजेपी पर राम को मुद्दे में घसीटने का आरोप लगाया। इस पर बीजेपी विधायक सीताशरण शर्मा ने आपत्ति जताते हुए आपत्तिजनक शब्दों से बचने की नसीहत दी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई और बयान को विलोपित करने की मांग उठी।
मनरेगा के नाम को लेकर भी तकरार हुई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। सत्ता पक्ष के विधायकों ने कहा कि राम का अपमान हमेशा कांग्रेस ने किया है। समाचार लिखे जाने तक सदन में हंगामा जारी था और बजट सत्र का माहौल पूरी तरह गर्माया हुआ था।

