खंडवा। मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से करीब 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक घटना के बाद शासन और प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन लोगों को राहत और जवाबदेही देने के बजाय अब नेताओं के बयान जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विवादित बयान के बाद अब खंडवा से भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का बयान सामने आया है, जिसने जनता की बची-खुची उम्मीदों को भी तोड़ दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इंदौर जैसी घटना के बाद खंडवा में दूषित पानी की रोकथाम और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल किया गया, तो सांसद ने कहा कि सिर्फ सरकार ही सब कुछ करे, ऐसा ठीक नहीं है और जनता की भी जिम्मेदारी बनती है।
सांसद के इस बयान को सीधे तौर पर जनता पर जिम्मेदारी डालने के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या अब आम लोग खुद सड़कें खोदकर पाइपलाइन डालेंगे, निगम की टंकियां साफ करेंगे और घर-घर शुद्ध पानी पहुंचाएंगे। अगर ये सारी जिम्मेदारियां जनता को ही निभानी हैं, तो फिर जिम्मेदार पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों की भूमिका क्या रह जाती है।
यह पहला मौका नहीं है जब मौत जैसे गंभीर मुद्दे पर भाजपा नेताओं के बयान विवादों में आए हों। इससे पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का ‘घंटा’ वाला बयान भी लोगों के गुस्से का कारण बना था, जिस पर कांग्रेस ने अनोखे तरीकों से विरोध प्रदर्शन किया और मंत्री को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा।
दूषित पानी से हुई मौतों ने पहले ही प्रशासन की पोल खोल दी है और अब ऐसे बयान जनता के आक्रोश को और भड़का रहे हैं। सवाल साफ है कि जवाबदेही किसकी है और आम जनता को कब तक ऐसी संवेदनहीन राजनीति का शिकार बनाया जाता रहेगा।

