Bihar Elections 2025: बिहार की राजनीति में आज वो दिन आ गया है, जिसे आने वाले वक्त में इतिहास के पन्नों में “भाई बनाम भाई” के नाम से याद किया जाएगा। लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों — तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव — अब आमने-सामने हैं।
रविवार, 2 नवंबर… ये वही दिन है जब बिहार की सियासी ज़मीन पर दो बड़े मंच सजने वाले हैं — एक मोकामा में और दूसरा महुआ में। और दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही मंचों पर ताल ठोकने जा रहे हैं, एक ही घर के दो वारिस।
तेजस्वी यादव का पहला पड़ाव होगा मोकामा। यहां वे आरजेडी प्रत्याशी वीणा देवी के लिए वोट मांगेंगे। लेकिन इस रैली की अहमियत सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि भावनात्मक और सियासी दोनों है। कुछ ही दिन पहले मोकामा में राजद के पूर्व नेता दुलारचंद यादव की हत्या ने पूरे बिहार की राजनीति को हिला दिया था। अब जब तेजस्वी पहली बार वहां पहुँचने वाले हैं, सबकी नज़रें उनके हर शब्द पर होंगी।
इस बीच, इस केस में बड़ी कार्रवाई भी हो चुकी है — पटना पुलिस ने अनंत सिंह को देर रात गिरफ्तार किया है। और अब मोकामा की जंग और भी दिलचस्प हो गई है, जहाँ अनंत सिंह, सूरजभान सिंह और आरजेडी की वीणा देवी के बीच मुकाबला त्रिकोणीय बन चुका है। तेजस्वी की रैली से कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने की उम्मीद की जा रही है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
तेजस्वी का अगला पड़ाव है वैशाली की महुआ सीट — और यहीं से शुरू होती है असली “भाई बनाम भाई” की लड़ाई।
क्योंकि महुआ में आरजेडी उम्मीदवार हैं मुकेश रोशन, और उनके खिलाफ मैदान में हैं — तेजस्वी के बड़े भाई, तेज प्रताप यादव, अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) के उम्मीदवार के तौर पर।
तेज प्रताप पहले भी 2015 में महुआ से विधायक रह चुके हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अलग पार्टी बनाकर सियासत का नया पत्ता खेला है।
तेजस्वी जहां अपने प्रत्याशी के लिए वोट मांगेंगे, वहीं तेज प्रताप पहले ही मीडिया को चेतावनी दे चुके हैं —
“अगर तेजस्वी महुआ आएंगे, तो मैं भी राघोपुर में जाकर उनके खिलाफ प्रचार करूंगा।”
और राघोपुर वही सीट है, जहां से खुद तेजस्वी यादव चुनाव लड़ रहे हैं।
अब तस्वीर साफ है…
2 नवंबर का दिन बिहार की सियासत में सिर्फ एक तारीख नहीं रहेगा — ये दिन होगा उस परिवार की राजनीतिक दरार का प्रतीक, जिसने कभी साथ मिलकर राज्य की सत्ता चलाई थी।
अब देखना ये है कि जनता किस भाई पर ज्यादा भरोसा जताती है — तेजस्वी पर, या तेज प्रताप पर।
क्योंकि आज की जंग सिर्फ कुर्सी की नहीं, इज़्ज़त और अस्तित्व की भी है।

