New Year पर बदले नियम बने सैलानियों की परेशानी, दमोह के पर्यटन स्थलों से मायूस लौट रहे पर्यटक, जानिए पूरी वजह

दमोह। नए साल के जश्न के लिए दमोह के संग्रामपुर स्थित सिंघौरगढ़, निदान बॉर्डर फॉल और भैंसा घाट जैसे पर्यटन स्थलों पर पहुंचे सैलानी अब निराश होकर वापस लौट रहे हैं। इसकी वजह यह है कि यह पूरा इलाका अब रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आ गया है, जिसके चलते यहां अचानक नियम बदल दिए गए हैं और इन नए नियमों ने पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

दमोह, जबलपुर और कटनी समेत आसपास के कई जिलों से लोग न्यू ईयर सेलिब्रेशन और पिकनिक मनाने यहां पहुंचे थे, लेकिन बदले हुए नियमों की जानकारी मिलते ही कई सैलानी लौटने को मजबूर हो गए। नए नियमों के तहत यहां प्रवेश शुल्क बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है और अब केवल फोर व्हीलर वाहनों को ही जाने की अनुमति दी जा रही है। टू व्हीलर, बस और मिनी बस को पूरी तरह रोक दिया गया है, वहीं पैदल प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

एक फोर व्हीलर में अधिकतम छह लोगों को जाने की अनुमति है और उसके लिए 1500 रुपये की टिकट तय की गई है, जिससे सैलानी खासे नाराज और परेशान नजर आ रहे हैं। नए साल के मौके पर लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने निकलते हैं, लेकिन दमोह के इन दर्शनीय स्थलों पर अचानक लागू हुए नियमों ने उनकी खुशियों पर पानी फेर दिया है।

वनरक्षक शहजाद ने बताया कि अब यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व में शामिल हो चुका है, इसलिए यहां टाइगर रिजर्व के नियम लागू किए गए हैं। उन्होंने सैलानियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, हालांकि बदले नियमों से पर्यटकों की नाराजगी साफ तौर पर देखने को मिल रही है।

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