खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर दावे और आपत्तियों के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि फॉर्म क्रमांक 7 का दुरुपयोग कर झूठी आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, जिससे आम मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है।
इसी के विरोध में कांग्रेस नेता पहले मोघट थाना पहुंचे और फिर एसडीएम कार्यालय जाकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम से आपत्तियां लगाई गई हैं, उनमें कई ऐसे लोग हैं जिन्हें खुद पता ही नहीं कि उनके नाम से शिकायत दर्ज कराई गई है।
उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई है, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फर्जी आपत्तियां लगाने वालों पर निर्वाचन आयोग ने सख्त कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन कार्यालय की पिछले 15 दिनों की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की भी मांग की है, ताकि यह साफ हो सके कि आपत्तियां किसने और कैसे जमा कीं।
शिकायत के दौरान कांग्रेस अपने साथ एक ऐसे व्यक्ति को भी लेकर पहुंची, जिसके नाम से कथित तौर पर 227 आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
उस व्यक्ति ने कहा कि उसने न तो कोई शिकायत की है और न ही कोई आपत्ति लगाई है, बावजूद इसके उसके गलत हस्ताक्षर और EPIC नंबर का इस्तेमाल कर सैकड़ों लोगों के नाम पर आपत्तियां दर्ज कर दी गईं।
वहीं एसडीएम ऋषि सिंघई ने कहा कि कांग्रेस नेता उनसे मिलने आए थे और SIR के तहत फॉर्म 7 से आई दावे-आपत्तियों को लेकर आवेदन दिया गया है।
उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार हर आपत्तिकर्ता को सूचना देकर बुलाया जा रहा है और यदि कोई उपस्थित नहीं होता, तो मामले की जांच कर नियम अनुसार निराकरण किया जाएगा।
इधर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस मामले को गंभीर बताया है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भोपाल में वोट कटवाने के लिए दूसरे व्यक्ति के नाम और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग कर 9 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज होना लोकतंत्र को कमजोर करने वाला कृत्य है।
उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करती है, जिसका मकसद मतदाताओं को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित करना है।
नेता प्रतिपक्ष ने साफ कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चुनाव आयोग को निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि एक भी पात्र मतदाता का नाम न कटे।

