भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के सभाकक्ष में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवचयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे। ये कोई साधारण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि देश में पहली बार सरकारी नियुक्तियां पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी और करप्शन-फ्री पद्धति से की गईं—और एमपी ने सुशासन का एक शानदार उदाहरण पेश किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की सबसे निचली पायदान पर सेवा करने वाली बहनों को प्रदेश की सबसे ऊंची पायदान—विधानसभा—में नियुक्ति पत्र देना अपने आप में एक नया इतिहास है। उन्होंने सभी को कुपोषण से लड़ने का संकल्प दिलाया और कहा कि जैसे यशोदा मैया ने भगवान कृष्ण को संस्कार दिए, वैसे ही आंगनवाड़ी में बच्चों को शिक्षा और अच्छे संस्कार देना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
नवचयनित कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने विधानसभा की कार्यवाही भी देखी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पारदर्शी ऑनलाइन चयन प्रक्रिया की सराहना करते हुए सभी को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में मंत्री निर्मला भूरिया, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और प्रमुख सचिव जीवी रश्मि मौजूद रहे। अर्चना चिटनिस ने सभी को कर्तव्यनिष्ठ रहने की शपथ दिलाई, जबकि मंत्री निर्मला भूरिया ने अपना संबोधन दिया।
प्रदेश में लगभग 19,250 रिक्त पदों के लिए 4 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे। इनमें से करीब 12,075 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए हैं। देश में पहली बार ऑनलाइन पारदर्शी पद्धति से नियुक्ति होने के कारण डॉक्यूमेंट गुम होने या छूटने की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है। अब चयन सौ प्रतिशत मेरिट पर आधारित है, साथ ही दावा, आपत्ति और अपील की व्यवस्था भी मौजूद है।
नवनियुक्त कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हर महीने करीब 14 करोड़ रुपये मानदेय के रूप में दिए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को अभिनंदन पत्र भी भेंट किया।
यह सच में एमपी के सुशासन का एक नया अध्याय है—करप्शन-फ्री, पारदर्शी और पूरी तरह ऑनलाइन नियुक्ति व्यवस्था का अद्भुत उदाहरण।

