लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को कम्प्लायंस रिडक्शन फेज टू की अहम बैठक में शामिल हुए, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक सुधारों को लेकर सरकार की स्पष्ट मंशा सामने रखी। सीएम योगी ने कहा कि डी-रेगुलेशन का मतलब नियंत्रण खत्म करना नहीं है, बल्कि अनावश्यक नियमों और प्रक्रियाओं को हटाकर जरूरी व्यवस्थाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि शासन का लक्ष्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जहां नागरिकों और उद्यमियों को बेवजह की अनुमतियों, जटिल प्रक्रियाओं और बार-बार के निरीक्षणों से राहत मिले। प्रशासन भरोसे पर आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि आम आदमी को यह महसूस हो कि व्यवस्था अब पहले से ज्यादा आसान और सुलभ हो गई है।
सीएम योगी ने दोहराया कि सरकार का संकल्प उत्तर प्रदेश को ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस दोनों ही क्षेत्रों में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अपने-अपने सुधारों को तय समय सीमा में लागू करें और उनकी नियमित मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करें। ये सुधार केवल उद्योगों या निवेशकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि आम नागरिक के रोजमर्रा के जीवन को भी आसान बनाने वाले हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे घर बनाने की अनुमति हो, बिजली और पानी का कनेक्शन लेना हो या किसी अन्य सरकारी सेवा से जुड़ा काम, हर प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। यही सुशासन की पहचान है और इसी दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

