भोपाल। मध्यप्रदेश में बड़वानी में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट को लेकर सियासत तेज हो गई है। डॉ. मोहन यादव सरकार की इस बैठक पर कांग्रेस ने सीधे सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसान और आदिवासी मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगे हैं। इस पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी गई है।
जीतू पटवारी ने अपने पत्र में लिखा है कि जब कृषि कैबिनेट जनजातीय अंचल बड़वानी में हो रही है, तो सवाल भी जमीन से उठने चाहिए और अब उनके जवाब देना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गेहूं की फसल कटकर मंडियों में पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद की पुख्ता व्यवस्था अब तक क्यों नहीं की गई। क्या किसानों को फिर औने-पौने दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर किया जाएगा।
उन्होंने गेहूं, सोयाबीन और धान की बढ़ी हुई एमएसपी का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि किसानों को पूरी कीमत कब और कैसे मिलेगी। साथ ही यह भी सवाल किया कि अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील के बाद सस्ते कृषि उत्पाद अगर देश में आते हैं, तो मध्यप्रदेश के किसानों को नुकसान से बचाने के लिए राज्य सरकार की क्या ठोस रणनीति है। क्या कोई प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड बनाया गया है।
पटवारी ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और मुआवजे के भुगतान में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खाद, बीज, डीजल और बिजली की बढ़ती कीमतों से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सरकार क्या राहत पैकेज लाएगी।
कांग्रेस ने आदिवासी मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। पत्र में दावा किया गया कि प्रदेश से बड़ी संख्या में बच्चियां लापता हैं, जिनमें हजारों आदिवासी समाज से हैं। सरकारी नौकरियों में आदिवासी वर्ग के बैकलॉग पद अब तक खाली क्यों हैं और उन्हें भरने की समयसीमा क्या है। छात्रवृत्ति में देरी, आदिवासी समाज के खिलाफ बढ़ते अपराध और जनप्रतिनिधियों को दी गई कथित धमकियों पर भी सरकार से जवाब मांगा गया है।
जीतू पटवारी ने लिखा कि बड़वानी सिर्फ कैबिनेट का स्थल नहीं, बल्कि प्रदेश की जनजातीय पहचान का प्रतीक है। अगर कृषि कैबिनेट सच में किसान और आदिवासी के नाम पर है, तो मंचीय घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीनी सवालों के स्पष्ट जवाब देने होंगे।

