बिहार चुनाव और उसके नतीजों के बीच कांग्रेस नेता उदित राज का एक सनसनीखेज बयान लोगों के बीच तूफान की तरह फैल गया है। उदित राज ने दावा किया है कि तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से जीते नहीं थे, बल्कि उन्हें बीजेपी और चुनाव आयोग ने जिताया, ताकि चुनाव को निष्पक्ष दिखाया जा सके। उनका कहना है कि तेजस्वी शाम तक पीछे चल रहे थे, लेकिन नतीजों ने अचानक करवट ली और उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया। उदित राज के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में जबरदस्त खलबली मची हुई है।
उदित राज यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पहले से पता था कि चुनाव तयशुदा थे और परिणाम क्या आएंगे। उनका यह आरोप चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है, जिससे विपक्ष में मौजूद नाराज़गी और गहरी हो गई है।
इस दौरान उदित राज ने रोहिणी आचार्य और परिवारिक विवाद पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लालू यादव के इतने बड़े परिवार में नोकझोंक होना स्वाभाविक है और इसमें असामान्य कुछ भी नहीं है। उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाया कि वह दलित और पिछड़ों की कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाती है, लेकिन असल मुद्दों जैसे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और किसानों की परेशानी पर उतना ध्यान नहीं देती।
उदित राज ने कहा कि रोहिणी आचार्य को भी एक दिन इस विवाद पर पछतावा होगा और परिवार से जुड़ी बातों को सार्वजनिक रूप से हवा देना सही नहीं था। उन्होंने कहा कि मां-बाप की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए और यह बयान उनका व्यक्तिगत मत है।
कुल मिलाकर उदित राज के दावे ने बिहार चुनाव, तेजस्वी यादव की जीत और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर एक नई बहस छेड़ दी है।

