भोपाल। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। भोपाल में कांग्रेस की डिक्लेरेशन-2 ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक के दौरान उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति के विधायकों और सांसदों की स्थिति की तुलना ‘कुत्ते’ से कर दी। यह बयान उस समय दिया गया, जब मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
फूल सिंह बरैया ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने पहले ही जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम को लेकर चेताया था। उन्होंने कहा कि जॉइंट इलेक्टोरल में प्रवेश करने के बाद हमारे जनप्रतिनिधियों की हालत उस कुत्ते जैसी हो जाती है, जिसके मुंह पर पट्टी बंधी हो। न वह काट सकता है और न ही भौंक सकता है। बरैया ने जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम को SC-ST समुदाय की दुर्दशा का कारण बताते हुए सेपरेट इलेक्टोरल की मांग की और कहा कि यही बाबा साहब के सपने को पूरा करने का रास्ता है।
इतना ही नहीं, फूल सिंह बरैया ने आदिवासियों को लेकर भी बेहद विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोशिश की जानी चाहिए कि आदिवासी हिंदू न बन पाए। उन्होंने झारखंड में सरना धर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि आदिवासियों को सरना धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए, तभी उनकी मुक्ति संभव है। बरैया ने दावा किया कि आदिवासी आज भी पूरी तरह सभ्य नहीं हो पाए हैं और जंगलों की कटाई से उनका पारंपरिक ज्ञान प्रभावित हो रहा है।
बरैया के ये बयान भोपाल के समन्वय भवन में हुई बैठक के दौरान सामने आए, जहां दिग्विजय सिंह और विक्रांत भूरिया जैसे नेता भी मौजूद थे। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
सेपरेट इलेक्टोरल सिस्टम की बात करें तो यह वह व्यवस्था है, जिसमें मतदाताओं को जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा जाता है और हर समूह अपने समुदाय के उम्मीदवार को चुनता है। ब्रिटिश शासनकाल में इसका इस्तेमाल किया गया था, लेकिन सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने के कारण इसे खत्म कर दिया गया। इसके बाद भारत में जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम लागू किया गया, जिसमें सभी वर्ग एक साथ वोट डालते हैं, हालांकि आरक्षित सीटों पर SC-ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ते हैं।

