बैतूल में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार, 37 लाख की सड़क हाथ से उखड़ती दिखी

बैतूल। मध्यप्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने पर जहां हर तरफ विकास कार्यों की तारीफ की जा रही है, वहीं बैतूल जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इन दावों की हकीकत उजागर कर देती है. यहां सड़क, पुल और नाली निर्माण में खुलेआम भ्रष्टाचार की मलाई अधिकारी और ठेकेदार मिलकर खाते नजर आ रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि नई बनी सड़क की परत हाथ से उखाड़ी जा सकती है और लोगों का कहना है कि ऐसी सड़क से बेहतर है बिना सड़क ही काम चला लिया जाए, ताकि सरकार का पैसा तो बच सके.

दावे गुणवत्ता के, लेकिन ज़मीन पर दिखी सच्चाई
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भले ही सरकार की प्रतिबद्धता की बात कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. बैतूल जिले के आठनेर नगर परिषद क्षेत्र से सामने आए एक वायरल वीडियो ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है. वीडियो में एक युवक आक्रोश में आकर एक दिन पहले बनी सड़क की ऊपरी परत को केक की तरह तोड़कर निकालता दिखाई दे रहा है, जो साफ तौर पर बताता है कि सड़क की मजबूती किस स्तर की है.

37 लाख की सड़क, 37 घंटे भी टिकने पर सवाल
बताया जा रहा है कि आठनेर नगर परिषद क्षेत्र में बनी इस करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क पर 37 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन निर्माण की हालत देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि यह सड़क 37 घंटे भी टिक पाएगी या नहीं. स्थानीय लोग इस भ्रष्टाचार से पूरी तरह परेशान हो चुके हैं और कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन न तो नगर परिषद और न ही जिला प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई होती दिखाई दे रही है.

पहले भी बह चुकी है सड़क, फिर भी मिला ठेका
शिकायतकर्ता डॉ माथनकर ने बताया कि इस सड़क का टेंडर प्रशांत तिवारी को दिया गया था, जिनका पिछला काम भी महज 20 मिनट की बारिश में बह गया था. उन्होंने बताया कि पहले भी तहसील रोड पर कायाकल्प योजना के तहत बनाई गई सड़क पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी और काम रोका भी गया था, लेकिन जांच के नाम पर वही प्रक्रिया दोहराई जाती है. सैंपल टेस्ट भी उन्हीं की लैब से कराए जाते हैं और कागजों में काम पूरा दिखा दिया जाता है.

गहरे तक फैला है करप्शन का नेटवर्क
भ्रष्टाचार के सबूत सामने हैं, जिम्मेदार लोग भी सबकी नजरों में हैं और कार्रवाई करने का मौका भी मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद चुप्पी इस बात का सबूत है कि करप्शन की जड़ें काफी गहरी हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या कभी इस भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होगी या फिर विकास के नाम पर यूं ही जनता के पैसे की लूट चलती रहेगी.

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