भोपाल। मध्यप्रदेश में SIR को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है और इसी मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जीतू पटवारी ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से शिकायत करते हुए कहा कि केवल तीन दिनों में 3 लाख से 11 लाख नामों का बढ़ जाना एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। उनका आरोप है कि फार्म 7 के जरिए मतदाता सूची से नाम काटे जा रहे हैं और इसे शुद्धिकरण बताकर भाजपा मंत्रियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो अपने आप में सवाल खड़े करता है।
जीतू पटवारी ने कहा कि यदि यह प्रक्रिया निष्पक्ष है तो फिर भाजपा के मंत्रियों को क्यों लगाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं के नाम जानबूझकर कटवा रही है। नियम के मुताबिक एक व्यक्ति केवल एक ही आपत्ति दर्ज कर सकता है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक-एक व्यक्ति द्वारा 25-25 आपत्तियां दर्ज कराईं और इसके प्रमाण कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग को सौंप दिए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बीएलओ को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी बूथ पर अनियमितता पाई गई तो एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी बीएलओ ने भाजपा के दबाव में आकर अवैध तरीके से नाम जोड़े या काटे, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के असम और बिहार से जुड़े निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कानून सब पर बराबर लागू होगा। जीतू पटवारी ने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा के लिए काम करने वालों को बाद में कोई बचाने नहीं आएगा और आपकी पूरी सर्विस रिकॉर्ड खराब हो जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से बीएलओ का काम कराया जा रहा है और लोगों को बिना जानकारी दिए उनके नाम से ऑनलाइन फर्जी आपत्तियां डाली जा रही हैं। खासतौर पर अल्पसंख्यक और आदिवासी इलाकों में यह खेल ज्यादा चल रहा है। जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा वोट चोरी करके चुनाव जीतना चाहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री विश्वास सारंग की सीट और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक लाख वोट कम हुए हैं, जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम था। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांग की है कि इन गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
प्रशासन पर हमला बोलते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्य सचिव की कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस से जुड़ी खबरें सामने आई हैं, जिनमें कहा गया कि एक भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता और सरकार को यह बात पता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सवाल किया है कि अगर “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” का दावा है, तो फिर मध्यप्रदेश में यह सब कैसे चल रहा है।
प्रदेश की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रशासनिक अराजकता है और हर स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। उनका कहना है कि जब ऊपर से लेकर नीचे तक पैसे का खेल चल रहा हो, तो आम आदमी का बिना घूस दिए काम होना नामुमकिन हो जाता है और यही सच्चाई प्रदेश का हर नागरिक जानता है।
भोजशाला मामले पर जीतू पटवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति, सभ्यता और भाईचारे की रक्षा हर नागरिक का दायित्व है और हिंदू अपने समय पर पूजा करें, मुसलमान अपने समय पर नमाज अदा करें। उन्होंने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

