भोपाल। मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत दावा–आपत्ति की प्रक्रिया जारी है, इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने गंभीर आरोप लगाकर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
दिग्विजय सिंह ने कहा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस समर्थकों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं और इसके लिए बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट्स को बाकायदा टारगेट दिया गया है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब दावा–आपत्ति का समय चल रहा है, जिसमें जिन मतदाताओं ने 2003 की मतदाता सूची के आधार पर अपने या अपने माता-पिता के विवरण सही कराए थे, उनके नाम अंतिम सूची में दर्ज हो चुके हैं, जबकि मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और डुप्लीकेट एंट्री भी सुधारी गई है।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि इसी दावा–आपत्ति प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए बीजेपी द्वारा बड़ी संख्या में फॉर्म नंबर 7 अपने बूथ लेवल एजेंट्स को बांटे गए हैं, जिनकी प्रिंटिंग BLO के पास उपलब्ध फॉर्म्स से अलग है, जिससे संदेह पैदा होता है कि ये फॉर्म या तो निर्वाचन आयोग से विशेष रूप से उपलब्ध कराए गए हैं या फिर बीजेपी ने खुद बड़े पैमाने पर छपवाए हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी संगठन ने जिले भर में अपने बूथ लेवल एजेंट्स की बैठक लेकर उन्हें निर्देश दिए हैं कि हर मतदान केंद्र पर 100 से 150 कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम इस आधार पर आपत्ति में डलवाए जाएं कि वे अनुपस्थित हैं।
दिग्विजय सिंह ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बनाकर अवैध और असत्य आधारों पर पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को टैग करते हुए इस पूरे मामले पर संज्ञान लेने और चुनाव आयोग को अवगत कराने की मांग भी की है, जिसके बाद यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।

