भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार की कैबिनेट ने आज कई अहम फैसले लिए हैं। सबसे बड़ा निर्णय सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित 25,602 आदिवासी परिवारों के आवासों की रजिस्ट्री अब पूरी तरह निःशुल्क कराने का है। पहले ये रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी, लेकिन अब सरकार ने इसे मुफ्त कराने का ऐलान किया है, जिससे आदिवासियों को अपनी जमीन का वैध दस्तावेज़ मिलेगा और उनकी सुरक्षा मजबूत होगी।
इसके साथ ही कैबिनेट ने धनवाही और बरही सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो प्रदेश के सिंचाई तंत्र को मजबूत बनाएंगी और किसानों को पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक कई विभागों की योजनाओं को निरंतरता देने का फैसला भी किया है, ताकि विकास के काम बिना बाधा जारी रह सकें।
राज्य समाज कल्याण बोर्ड के कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास विभाग में विलय करने की मंजूरी भी कैबिनेट ने दी है, जिससे प्रशासनिक ढांचा और ज्यादा प्रभावी होगा।
मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने भावांतर योजना को पूरी तरह लागू किया है। इस योजना के तहत किसानों को फसलों के भाव का अंतर दो माह के भीतर ही भुगतान किया जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने हाल ही में पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया, जो महाकाल लोक की तर्ज पर बनाया गया है और पर्यटन व धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।
भोपाल में पहली बार आयोजित पुष्प महोत्सव भी इस साल कैबिनेट की मंजूरी से सफल हुआ, जो केवल फूलों की प्रदर्शनी नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक बड़ा उत्सव भी है।
इस प्रकार सरकार ने विकास के कई महत्वपूर्ण आयामों को छूते हुए प्रदेश के लोगों के हित में ठोस कदम उठाए हैं।

