भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को कर्मचारियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया, जहां ई-अटेंडेंस पर तत्काल रोक, पुरानी पेंशन योजना लागू करने और कोर्ट के आदेशों के पालन समेत कई मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि प्रोविजन पीरियड से जुड़े न्यायालय के आदेशों पर सरकार को तुरंत अमल करना चाहिए और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी बंद होनी चाहिए।
भोपाल में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ, मध्य प्रदेश शासकीय वाहन चालक यांत्रिकी कर्मचारी संघ और मध्य प्रदेश लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ के बैनर तले तीन संगठनों ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा खोला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
कर्मचारियों ने मांग की कि कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान तिथि से महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दी जाए, कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिले और हाईकोर्ट जबलपुर के फैसले के आधार पर 2019 से नवनियुक्त कर्मचारियों को 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने की व्यवस्था पर रोक लगाकर पिछली तिथि से एरियर का भुगतान किया जाए। इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना लागू करने, शिक्षकों को समयमान और क्रमोन्नत वेतनमान देने, लिपिक संवर्ग को मंत्रालय के समान ग्रेड पे देने और दैनिक वेतन, स्थाई, आउटसोर्स व संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई गई।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि अनुकंपा नियुक्ति और चतुर्थ श्रेणी की पदोन्नति में CPCT की अनिवार्यता खत्म की जाए, सेवानिवृत्ति के दिन ही पीपीओ और सभी स्वत्वों का भुगतान हो, ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तत्काल रोका जाए और 1997 में नियुक्त गुरुजी संवर्ग को पहली नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता का लाभ दिया जाए।
कर्मचारी संगठनों ने साफ किया कि आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। शुक्रवार को संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सात कर्मचारी संगठन एक बार फिर मैदान में उतरेंगे। सरकारी सेवा में तीन बच्चों की बाध्यता समाप्त करने और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदनाम में बदलाव की मांग भी उठाई जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों ने मंत्रालय का घेराव करने का ऐलान कर सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति साफ कर दी है।

