पूर्व विधायक की बदजुबानी से मचा बवाल, बहन-बेटियों को बताया प्लॉट और संत पर की आपत्तिजनक टिप्पणी

भोपाल। मध्य प्रदेश में नेताओं की बयानबाज़ी लगातार विवादों में घिरती जा रही है और अब पूर्व विधायक आरडी प्रजापति का बयान सियासी तूफान खड़ा कर रहा है। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए उन्होंने कथावाचकों और महिलाओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की और बहन-बेटियों की तुलना प्लॉट से कर दी। यही नहीं, एक संत के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे कार्यक्रम के बाद माहौल गरमा गया।

दरअसल, भोपाल में विवादित आईएएस संतोष वर्मा के समर्थन में ‘संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ जनाक्रोश महाआंदोलन’ का आयोजन किया गया था, जिसमें प्रदेशभर से एससी-एसटी-ओबीसी संगठनों के लोग शामिल हुए। इसी मंच से संबोधन के दौरान पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के बोल बेकाबू हो गए। उन्होंने कहा कि अब बहन-बेटियां प्लॉट बन गई हैं, कोई सौ बार रजिस्ट्री कराए या हजार बार, और यह बातें उन्होंने संतों के कथित बयानों का हवाला देकर कही।

आरडी प्रजापति यहीं नहीं रुके, उन्होंने एक संत पर सीधा हमला करते हुए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और सवाल किया कि क्या वह अपनी एंजॉय वाली मां से पैदा हुए हैं। उन्होंने कथावाचकों को लेकर भी अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा कि कथाओं में जाने वाली युवतियों पर गलत बातें कही जाती हैं, जो समाज के लिए शर्मनाक है।

अपने बयान को और तीखा बनाते हुए आरडी प्रजापति ने कहा कि अगर जरूरत पड़े तो उन्हें फांसी दे दी जाए या आईएएस संतोष वर्मा को सेवा से हटा दिया जाए, लेकिन उससे पहले कथावाचकों को जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने कार्यक्रम को पूरी तरह विवादों के केंद्र में ला दिया।

गौरतलब है कि इस महासम्मेलन में दलित, आदिवासी और ओबीसी संगठनों ने एक स्वर में आईएएस संतोष वर्मा के समर्थन का ऐलान किया और सरकार के खिलाफ सामाजिक न्याय, आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद की। मंच से वक्ताओं ने आरक्षण के विस्तार, रिक्त पदों की भर्ती, पदोन्नति में आरक्षण, पुरानी पेंशन व्यवस्था, छात्रवृत्ति, न्यायिक और प्रशासनिक नियुक्तियों में प्रतिनिधित्व और बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापना जैसी मांगों को दोहराया।

पूर्व विधायक के इस बयान के बाद अब एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि सार्वजनिक मंचों से इस तरह की भाषा आखिर कब तक बर्दाश्त की जाएगी और क्या इस बयानबाज़ी पर कोई सख्त कार्रवाई होगी।

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